| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 179: घटोत्कचका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा चलायी हुई इन्द्रप्रदत्त शक्तिसे उसका वध » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 7.179.14  | तौ कर्णिनाराचशिलीमुखैश्च
नालीकदण्डासनवत्सदन्तै:।
वराहकर्णै: सविपाठशृङ्गै:
क्षुरप्रवर्षैश्च विनेदतु: खम्॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | वे दोनों करणी, नाराच, शिलिमुख, नालिक, दण्ड, आसन, वत्सदन्त, वराहकर्ण, विपथ, सींग और क्षुरप्ररूपी दैत्यों की वर्षा करके अपनी गर्जना से आकाश को गुंजायमान करने लगे॥14॥ | | | | Both of them started resonating the sky with their thunder by showering Karni, Narach, Shilimukh, Nalik, Danda, Asan, Vatsdant, Varahkarna, Vipath, Sing and Kshurpro. 14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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