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श्लोक  7.178.30 
तौ स्विन्नगात्रौ प्रस्वेदं सुस्रुवाते जनाधिप।
रुधिरं च महाकायावतिवृष्टाविवाम्बुदौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! उन विशाल राक्षसों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे, मानो दो बादल भारी वर्षा कर रहे हों। उनके शरीर से पसीने के साथ-साथ रक्त भी बह रहा था।
 
O Lord of men! The bodies of those gigantic demons were drenched in sweat like two clouds pouring heavy rain. They were shedding blood along with sweat from their bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)