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mahabharat 7.178.21: किन्तु वीर घटोत्कच ने अपने बाणों की वर्षा से उन दिशाओं में स्थित उस भयंकर शिला-वर्षा को नष्ट कर दिया। यह अद्भुत कार्य था।   |   mahabharat अध्याय 7.178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.178.21 
अश्मवर्षं स तं घोरं शरवर्षेण वीर्यवान्।
दिक्षु विध्वंसयामास तदद्भुतमिवाभवत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
किन्तु वीर घटोत्कच ने अपने बाणों की वर्षा से उन दिशाओं में स्थित उस भयंकर शिला-वर्षा को नष्ट कर दिया। यह अद्भुत कार्य था।
 
But the valiant Ghatotkacha destroyed that terrible shower of rocks in those directions by showering his arrows. It was a wonderful deed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)