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mahabharat 7.178.11: तत्पश्चात् वे नकुल, सहदेव और महारथी सात्यकि नामक राक्षसों का वध करके उस स्थान पर पहुँचे जहाँ सूतपुत्र कर्ण था॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.178.11 
ततस्तेऽप्याययुर्हत्वा राक्षसान् यत्र सूतज:।
नकुल: सहदेवश्च सात्यकिश्च महारथ:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे नकुल, सहदेव और महारथी सात्यकि नामक राक्षसों का वध करके उस स्थान पर पहुँचे जहाँ सूतपुत्र कर्ण था॥11॥
 
After that, after killing the demons Nakul, Sahadev and the great charioteer Satyaki, they reached the place where Suta's son Karna was. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)