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mahabharat 7.177.29-30h: तब कुन्तीपुत्र भीमसेन ने राक्षसराज अलायुध पर बाणों की वर्षा की, किन्तु राक्षसराज अलायुध ने अपने तीखे बाणों से उसके सभी बाणों को निष्फल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.177: भीमसेन और अलायुधका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 177: भीमसेन और अलायुधका घोर युद्ध  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.177.29-30h 
स राक्षसेन्द्रं कौन्तेय: शरवर्षैरवाकिरत्॥ २९॥
तानप्यस्याकरोन्मोघान् राक्षसो निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र भीमसेन ने राक्षसराज अलायुध पर बाणों की वर्षा की, किन्तु राक्षसराज अलायुध ने अपने तीखे बाणों से उसके सभी बाणों को निष्फल कर दिया।
 
Then Kunti's son Bhimasena showered arrows on the demon king Alayudha, but the demon rendered all his arrows useless with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)