श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 176: अलायुधका युद्धस्थलमें प्रवेश तथा उसके स्वरूप और रथ आदिका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.176.19 
तस्यापि गोमायुबलाभिगुप्तो
बभूव केतुर्ज्वलनार्कतुल्य:।
स चापि रूपेण घटोत्कचस्य
श्रीमत्तमो व्याकुलदीपितास्य:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अलायुध का ध्वज अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी था। वह सियारों के समूह से चिह्नित प्रतीत होता था। उसका रूप भी घटोत्कच के समान तेजस्वी था। उसका मुख भी भयंकर और प्रज्वलित था॥19॥
 
Alayudha's flag was as radiant as the fire and the sun. It appeared to be marked by a group of jackals. His appearance was also as radiant as Ghatotkacha's. His face also appeared fierce and blazing.॥19॥
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