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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  7.175.90 
तेषु राजसहस्रेषु पाण्डवेयेषु मारिष।
नैनं निरीक्षितुमपि कश्चिच्छक्नोति पार्थिव:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! पाण्डव पक्ष के हजारों राजाओं में से उस समय एक भी राजा कर्ण की ओर देख नहीं सकता था।
 
Honorable King! Among the thousands of kings of the Pandava side, not a single king could even look at Karna at that time. 90.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)