Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.175.9-10h: वह वक्षस्थल पर स्वर्ण पदक और अग्नि की माला पहने हुए पर्वत के समान प्रतीत हो रहा था। उसके सिर पर सोने का बना एक अनोखा और चमकीला मुकुट तोरण की तरह शोभायमान था। उस मुकुट के विभिन्न अंग उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह वक्षस्थल पर स्वर्ण पदक और अग्नि की माला पहने हुए पर्वत के समान प्रतीत हो रहा था। उसके सिर पर सोने का बना एक अनोखा और चमकीला मुकुट तोरण की तरह शोभायमान था। उस मुकुट के विभिन्न अंग उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
He looked like a mountain wearing a golden medallion on his chest and a garland of fire. On his head, a unique and bright crown made of gold was looking beautiful like a festoon. The various parts of that crown were adding to its beauty. 9 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥