श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  7.175.89 
स हत्वा राक्षसीं सेनां शुशुभे सूतनन्दन:।
पुरेव त्रिपुरं दग्ध्वा दिवि देवो महेश्वर:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
जैसे पूर्वकाल में भगवान महेश्वर आकाश में त्रिपुरासुर को जलाकर शोभायमान हुए थे, उसी प्रकार सुतनंदन कर्ण भी दैत्यों की उस सेना का संहार करके अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे।89
 
Just as in the past Lord Maheshwara had looked beautiful after burning Tripurasura in the sky, similarly Sutanandana Karna looked very beautiful after killing that army of demons. 89
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)