Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.175.88: जैसे प्रलयकाल में अग्निदेव समस्त प्राणियों को भस्म कर देते हैं, उसी प्रकार महाबली कर्ण ने भी अपने बाणों से घोड़ों, सारथियों और हाथियों सहित उन राक्षसों को पीड़ा देकर जला डाला। | mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विधम्य राक्षसान् बाणै: साश्वसूतगजान् विभु:।
ददाह भगवान् वह्निर्भूतानीव युगक्षये॥ ८८॥
अनुवाद
जैसे प्रलयकाल में अग्निदेव समस्त प्राणियों को भस्म कर देते हैं, उसी प्रकार महाबली कर्ण ने भी अपने बाणों से घोड़ों, सारथियों और हाथियों सहित उन राक्षसों को पीड़ा देकर जला डाला।
Just as Lord Agni reduces all creatures to ashes during the time of dissolution, similarly the powerful Karna tormented and burned those demons along with their horses, charioteers and elephants with his arrows. 88
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥