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mahabharat 7.175.84: तत्पश्चात् घटोत्कच ने अंजलिका नामक बाण चलाकर कर्ण के हाथ में जो विशाल धनुष था, उसे बाणों के समूह सहित शीघ्रतापूर्वक काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.175.84 
भूयश्चाञ्जलिकेनाथ सम्मार्गणगणं महत्।
कर्णहस्तस्थितं चापं चिच्छेदाशु घटोत्कच:॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् घटोत्कच ने अंजलिका नामक बाण चलाकर कर्ण के हाथ में जो विशाल धनुष था, उसे बाणों के समूह सहित शीघ्रतापूर्वक काट डाला।
 
Thereafter, by shooting an arrow called Anjalika, Ghatotkacha quickly cut off the huge bow in Karna's hand along with the bunch of arrows. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)