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mahabharat 7.175.79-80: तभी कर्ण ने देखा कि महारथी घटोत्कच अपने रथ पर सवार होकर पुनः आ रहा है। वह तनिक भी भयभीत नहीं था। सिंह, शार्दूल और मतवाले हाथियों के समान शक्तिशाली अनेक राक्षसों ने उसे घेर लिया था।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 79-80
 
 
श्लोक  7.175.79-80 
स दृष्ट्वा पुनरायान्तं रथेन रथिनां वरम्॥ ७९॥
घटोत्कचमसम्भ्रान्तं राक्षसैर्बहुभिर्वृतम्।
सिंहशार्दूलसदृशैर्मत्तमातङ्गविक्रमै:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तभी कर्ण ने देखा कि महारथी घटोत्कच अपने रथ पर सवार होकर पुनः आ रहा है। वह तनिक भी भयभीत नहीं था। सिंह, शार्दूल और मतवाले हाथियों के समान शक्तिशाली अनेक राक्षसों ने उसे घेर लिया था।
 
At that time Karna saw Ghatotkacha, the best of charioteers, arriving again on his chariot. He was not at all nervous. Many demons as powerful as lions, sharduls and drunken elephants had surrounded him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)