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mahabharat 7.175.78-79h: तब महाबली भीमसेन ने जोर से हंसकर युद्धभूमि में महाबली कर्ण के सामने अपनी महान माया का प्रदर्शन किया।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  7.175.78-79h 
तत: प्रहस्य समरे भैमसेनिर्महाबल:॥ ७८॥
प्रादुश्चक्रे महामायां कर्णं प्रति महारथम्।
 
 
अनुवाद
तब महाबली भीमसेन ने जोर से हंसकर युद्धभूमि में महाबली कर्ण के सामने अपनी महान माया का प्रदर्शन किया।
 
Then the son of the mighty Bhimasena laughed loudly and displayed his great illusion to the mighty warrior Karna on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)