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mahabharat 7.175.72-73h: वह एक विशाल, ऊँचा पर्वत बन गया, जो वृक्षों के झुरमुटों और हरी-भरी चोटियों से सुशोभित था। उसमें से जल के सोते की तरह भाले, बरछी, तलवारें और मूसल जैसे अस्त्र-शस्त्रों का स्रोत बहने लगा। 72 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  7.175.72-73h 
सोऽभवद् गिरिरत्युच्च: शिखरैस्तरुसंकटै:॥ ७२॥
शूलप्रासासिमुसलजलप्रस्रवणो महान्।
 
 
अनुवाद
वह एक विशाल, ऊँचा पर्वत बन गया, जो वृक्षों के झुरमुटों और हरी-भरी चोटियों से सुशोभित था। उसमें से जल के सोते की तरह भाले, बरछी, तलवारें और मूसल जैसे अस्त्र-शस्त्रों का स्रोत बहने लगा। 72 1/2
 
It became a huge, tall mountain adorned with groves of trees and with lush green peaks. From it, like a spring of water, began flowing a source of weapons such as spears, lances, swords and pestles. 72 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)