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mahabharat 7.175.63-64h: तत्पश्चात् वह राक्षस अंगूठे के बराबर बड़ा हो गया और समुद्र की लहरों की तरह कभी ऊपर तो कभी इधर-उधर हिलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  7.175.63-64h 
अङ्गुष्ठमात्रो भूत्वा च पुनरेव स राक्षस:॥ ६३॥
सागरोर्मिरिवोद्‍धूतस्तिर्यगूर्ध्वमवर्तत।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह राक्षस अंगूठे के बराबर बड़ा हो गया और समुद्र की लहरों की तरह कभी ऊपर तो कभी इधर-उधर हिलने लगा।
 
Thereafter the demon became as big as a thumb and started moving sometimes up and sometimes here and there like the waves of the ocean. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)