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mahabharat 7.175.62-63h: फिर उन्होंने विशाल भुजाओं वाला विशाल रूप धारण किया और मैनाक पर्वत के समान प्रकट हुए। उस समय उनके सौ सिर और सौ उदर थे।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  7.175.62-63h 
पुनश्चापि महाकाय: शतशीर्ष: शतोदर:॥ ६२॥
व्यदृश्यत महाबाहुर्मैनाक इव पर्वत:।
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने विशाल भुजाओं वाला विशाल रूप धारण किया और मैनाक पर्वत के समान प्रकट हुए। उस समय उनके सौ सिर और सौ उदर थे।
 
Then he assumed a gigantic form with huge arms and appeared like the Mainak mountain. At that time he had a hundred heads and a hundred stomachs. 62 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)