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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  7.175.61-62h 
तं हतं मन्यमाना: स्म प्राणदन् कुरुपुङ्गवा:॥ ६१॥
अथ देहैर्नवैरन्यैर्दिक्षु सर्वास्वदृश्यत।
 
 
अनुवाद
उस समय उसे मरा हुआ समझकर कौरव सेना के प्रमुख योद्धा जोर-जोर से गर्जना करने लगे। इसी बीच वह अनेक नए शरीर धारण करके समस्त दिशाओं में प्रकट होने लगा।
 
At that time, considering him dead, the leading warriors of the Kaurava army started roaring loudly. Meanwhile, he assumed many new bodies and started appearing in all directions. 61 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)