Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.175.58-59h: कुरुश्रेष्ठ! भरतनन्दन! वह महाभ्रमणशील भीमसेनकुमार घटोत्कच अपनी माया से सबको मोहित करता हुआ सर्वत्र विचरण करने लगा। 58 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुश्रेष्ठ! भरतनन्दन! वह महाभ्रमणशील भीमसेनकुमार घटोत्कच अपनी माया से सबको मोहित करता हुआ सर्वत्र विचरण करने लगा। 58 1/2॥
Kurushrestha! Bharatnandan! That huge illusionist Bhimsenkumar Ghatotkacha started wandering everywhere, captivating everyone with his illusion. 58 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥