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mahabharat 7.175.57-58h: उस समय वह अपनी माया और तीव्र गति से कर्ण से युद्ध कर रहा था। आकाश से कर्ण पर बाणों की वर्षा हो रही थी, जिसका उसे पता भी नहीं चला। 57 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  7.175.57-58h 
सोऽयोधयत् तदा कर्णं मायया लाघवेन च॥ ५७॥
अलक्ष्यमाणानि दिवि शरजालानि चापतन्।
 
 
अनुवाद
उस समय वह अपनी माया और तीव्र गति से कर्ण से युद्ध कर रहा था। आकाश से कर्ण पर बाणों की वर्षा हो रही थी, जिसका उसे पता भी नहीं चला। 57 1/2
 
At that time he was fighting Karna by his magic and swift action. A shower of arrows was falling on Karna from the sky without being noticed. 57 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)