Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.175.54-55h: घटोत्कच के शरीर पर दो इंच भी ऐसी जगह नहीं बची थी जो बाणों से छिदी न हो। दो मिनट में ही वह काँटों से लदा साही जैसा दिखने लगा। | mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चास्यासीदनिर्भिन्नं गात्रे द्वॺङ्गुलमन्तरम्॥ ५४॥
सोऽदृश्यत मुहूर्तेन श्वाविच्छललितो यथा।
अनुवाद
घटोत्कच के शरीर पर दो इंच भी ऐसी जगह नहीं बची थी जो बाणों से छिदी न हो। दो मिनट में ही वह काँटों से लदा साही जैसा दिखने लगा।
There was not even two inches of space left on Ghatotkacha's body that was not pierced by arrows. In just two minutes he started looking like a porcupine covered with thorns.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥