Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.175.53-54h: कर्ण ने अपने समस्त घोड़ों को मारकर तथा रथ को सैकड़ों टुकड़ों में तोड़कर मेघ के समान बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.175.53-54h 
तस्य सर्वान् हयान् हत्वा संछिद्य शतधा रथम्॥ ५३॥
अभ्यवर्षच्छरै: कर्ण: पर्जन्य इव वृष्टिमान्।
 
 
अनुवाद
कर्ण ने अपने समस्त घोड़ों को मारकर तथा रथ को सैकड़ों टुकड़ों में तोड़कर मेघ के समान बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Having killed all his horses and broken the chariot into hundreds of pieces, Karna began to shower arrows like a rain-bearing cloud. 53 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)