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mahabharat 7.175.51-52h: तत्पश्चात् वह विशाल राक्षस अंतरिक्ष में कूदकर प्रलयकाल के मेघ के समान गर्जना करता हुआ आकाश से वृक्षों की वर्षा करने लगा। ॥51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.175.51-52h 
ततोऽन्तरिक्षमुत्पत्य कालमेघ इवोन्नदन्॥ ५१॥
प्रववर्ष महाकायो द्रुमवर्षं नभस्तलात्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह विशाल राक्षस अंतरिक्ष में कूदकर प्रलयकाल के मेघ के समान गर्जना करता हुआ आकाश से वृक्षों की वर्षा करने लगा। ॥51 1/2॥
 
Thereafter, jumping into space that huge demon started raining trees from the sky, roaring like a cloud at the time of doomsday. ॥ 51 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)