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mahabharat 7.175.50-51h: क्रोधित होकर घटोत्कच ने स्वर्ण कंगनों से सुसज्जित अपनी गदा घुमाई, किन्तु कर्ण के बाणों से घायल होकर वह भी गिर गई।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.175.50-51h 
घटोत्कचेन क्रुद्धेन गदा हेमाङ्गदा तदा॥ ५०॥
क्षिप्ताऽऽभ्राम्य शरै: सापि कर्णेनाभ्याहतापतत्।
 
 
अनुवाद
क्रोधित होकर घटोत्कच ने स्वर्ण कंगनों से सुसज्जित अपनी गदा घुमाई, किन्तु कर्ण के बाणों से घायल होकर वह भी गिर गई।
 
Enraged Ghatotkacha then swung his mace adorned with golden bracelets, but it too fell down after being hit by Karna's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)