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mahabharat 7.175.42-43h: उस भ्रम के नष्ट हो जाने पर घटोत्कच ने उसमें अमृत भरकर भयंकर बाण छोड़े, जो सूतपुत्र के शरीर में घुस गए।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  7.175.42-43h 
मायायां तु प्रहीणायाममर्षाच्च घटोत्कच:॥ ४२॥
विससर्ज शरान् घोरान् सूतपुत्रं त आविशन्।
 
 
अनुवाद
उस भ्रम के नष्ट हो जाने पर घटोत्कच ने उसमें अमृत भरकर भयंकर बाण छोड़े, जो सूतपुत्र के शरीर में घुस गए।
 
After that illusion was destroyed, Ghatotkacha filled it with nectar and released fierce arrows, which entered the body of Sutaputra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)