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mahabharat 7.175.38-39h: तत्पश्चात् चारों ओर से पत्थरों की अत्यन्त भयंकर एवं भारी वर्षा होने लगी। आधी रात के समय अधिक शक्तिशाली हो चुके राक्षसों के समूह पत्थरों की वर्षा कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.175.38-39h 
ततोऽश्मवृष्टिरत्युग्रा महत्यासीत् समन्तत:॥ ३८॥
अर्धरात्रेऽधिकबलैर्विमुक्ता रक्षसां बलै:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चारों ओर से पत्थरों की अत्यन्त भयंकर एवं भारी वर्षा होने लगी। आधी रात के समय अधिक शक्तिशाली हो चुके राक्षसों के समूह पत्थरों की वर्षा कर रहे थे।
 
Thereafter, a very fierce and heavy rain of stones started from all sides. At midnight, the groups of demons who had become more powerful were raining stones. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)