vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम
»
श्लोक 35-36h
श्लोक
7.175.35-36h
शूलमुद्गरधारिण्या शैलपादपहस्तया॥ ३५॥
रक्षसां घोररूपाणां महत्या सेनया वृत:।
अनुवाद
वह तुरन्त ही हाथों में शूल, मुदगर, शिलाएँ और वृक्ष धारण किए हुए भयंकर रूप वाले राक्षसों की विशाल सेना से घिर गया। 35 1/2॥
He was immediately surrounded by a huge army of demons with hideous forms holding spikes, mudgars, rocks and trees in their hands. 35 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×