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mahabharat 7.175.34-35h: कर्ण को दिव्यास्त्र चलाते देख पाण्डवनन्दन घटोत्कच ने अपनी राक्षसी माया प्रकट की ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.175.34-35h 
कर्णेन संधितं दृष्ट्वा दिव्यमस्त्रं घटोत्कच:॥ ३४॥
प्रादुश्चक्रे महामायां राक्षसीं पाण्डुनन्दन:।
 
 
अनुवाद
कर्ण को दिव्यास्त्र चलाते देख पाण्डवनन्दन घटोत्कच ने अपनी राक्षसी माया प्रकट की ॥34 1/2॥
 
Seeing Karna wielding the divine weapon, Pandavanandan Ghatotkacha revealed his demonic magic. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)