vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम
»
श्लोक 33-34h
श्लोक
7.175.33-34h
घटोत्कचं यदा कर्णो विशेषयति नो नृप॥ ३३॥
तत: प्रादुष्करोद् दिव्यमस्त्रमस्त्रविदां वर:।
अनुवाद
नरेश्वर! जब कर्ण घटोत्कच को परास्त न कर सका, तब शस्त्रज्ञों में श्रेष्ठ उस वीर योद्धा ने दिव्यास्त्र प्रकट किया।
Nareshwar! When Karna could not overcome Ghatotkacha, then that brave warrior, the best among weapons experts, revealed the divine weapon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×