श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  7.175.33-34h 
घटोत्कचं यदा कर्णो विशेषयति नो नृप॥ ३३॥
तत: प्रादुष्करोद् दिव्यमस्त्रमस्त्रविदां वर:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! जब कर्ण घटोत्कच को परास्त न कर सका, तब शस्त्रज्ञों में श्रेष्ठ उस वीर योद्धा ने दिव्यास्त्र प्रकट किया।
 
Nareshwar! When Karna could not overcome Ghatotkacha, then that brave warrior, the best among weapons experts, revealed the divine weapon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)