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mahabharat 7.175.20-21h: रथ पर दृढ़ता से खड़े होकर वह अपना धनुष खींच रहा था और उसकी ध्वनि गड़गड़ाहट की तरह थी। 20 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.175.20-21h 
तस्य विक्षिपतश्चापं रथे विष्टभ्य तिष्ठत:॥ २०॥
अश्रूयत धनुर्घोषो विस्फूर्जितमिवाशने:।
 
 
अनुवाद
रथ पर दृढ़ता से खड़े होकर वह अपना धनुष खींच रहा था और उसकी ध्वनि गड़गड़ाहट की तरह थी। 20 1/2
 
Standing firmly on the chariot, he was drawing his bow and its sound was like the rumbling of thunder. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)