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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम
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श्लोक 107
श्लोक
7.175.107
ततो दिग्भ्य: समापेतु: सिंहव्याघ्रतरक्षव:।
अग्निजिह्वाश्च भुजगा विहगाश्चाप्ययोमुखा:॥ १०७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् सिंह, व्याघ्र, गीदड़, अग्निमय जीभ वाले सर्प तथा लोहे के समान चोंच वाले पक्षी सब दिशाओं से आक्रमण करने लगे।
Thereafter, lions, tigers, jackals, serpents with fiery tongues and birds with iron-like beaks began attacking from all directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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