Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.175.106: महाराज! तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए भीमसेनपुत्र महाबली घटोत्कचन ने अनेक रूप धारण करके महारथियों को भयभीत कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  7.175.106 
तत: क्रुद्धो महाराज भैमसेनिर्महाबल:।
चकार बहुधाऽऽत्मानं भीषयाणो महारथान्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए भीमसेनपुत्र महाबली घटोत्कचन ने अनेक रूप धारण करके महारथियों को भयभीत कर दिया।
 
Maharaj! Thereafter, the mighty Ghatotkachana, son of Bhimasena, filled with anger, assumed many forms, frightening the mighty warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)