vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम
»
श्लोक 106
श्लोक
7.175.106
तत: क्रुद्धो महाराज भैमसेनिर्महाबल:।
चकार बहुधाऽऽत्मानं भीषयाणो महारथान्॥ १०६॥
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए भीमसेनपुत्र महाबली घटोत्कचन ने अनेक रूप धारण करके महारथियों को भयभीत कर दिया।
Maharaj! Thereafter, the mighty Ghatotkachana, son of Bhimasena, filled with anger, assumed many forms, frightening the mighty warriors.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×