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श्लोक  7.175.100 
कर्णं तु सर्वभूतानि पूजयामासुरञ्जसा।
यदवप्लुत्य जग्राह देवसृष्टां महाशनिम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
उस समय वहाँ उपस्थित सभी प्राणी कर्ण की प्रशंसा करने लगे, क्योंकि उसने अनायास ही छलांग लगाकर महादेवजी द्वारा उत्पन्न की गई प्रचण्ड अग्नि को पकड़ लिया था।
 
At that time all beings present there began to praise Karna because he had effortlessly jumped and caught the huge fire created by Mahadevji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)