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mahabharat 7.174.9-10: तब राजा दुर्योधन अत्यंत प्रसन्न होकर उससे बार-बार कहने लगा- 'वीर! द्रोणाचार्य और कर्ण आदि के साथ मैं स्वयं भी तुम्हारे शत्रुओं का संहार करने में समर्थ हूँ। तुम मेरी आज्ञा से घटोत्कच के पास जाओ और युद्ध में उसका वध कर डालो। वह क्रूर राक्षस मनुष्य और राक्षस दोनों के अंशों से उत्पन्न हुआ है।॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 7.174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  7.174.9-10 
तमब्रवीत् ततो राजा प्रीयमाण: पुन: पुन:।
द्रोणकर्णादिभि: सार्धं पर्याप्तोऽहं द्विषद्वधे॥ ९॥
त्वं तु गच्छ मयाऽऽज्ञप्तो जहि युद्धे घटोत्कचम्।
राक्षसं क्रूरकर्माणं रक्षोमानुषसम्भवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब राजा दुर्योधन अत्यंत प्रसन्न होकर उससे बार-बार कहने लगा- 'वीर! द्रोणाचार्य और कर्ण आदि के साथ मैं स्वयं भी तुम्हारे शत्रुओं का संहार करने में समर्थ हूँ। तुम मेरी आज्ञा से घटोत्कच के पास जाओ और युद्ध में उसका वध कर डालो। वह क्रूर राक्षस मनुष्य और राक्षस दोनों के अंशों से उत्पन्न हुआ है।॥9-10॥
 
Then King Duryodhana became very happy and told him repeatedly- 'Valiant one! Along with Dronacharya and Karna etc., I myself am capable of killing your enemies. You go to Ghatotkacha by my order and kill him in battle. That cruel demon is born from the parts of both man and demon.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)