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mahabharat 7.174.45: महाराज ! तत्पश्चात् मनुष्य और दानवों का वह घोर एवं भयानक युद्ध आरम्भ हो गया, जिससे युद्धस्थल में सब लोग भयभीत हो गए ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 7.174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.174.45 
तत: समभवद् युद्धं घोररूपं भयानकम्।
विस्मापनं महाराज नरराक्षसयोर्मृधे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! तत्पश्चात् मनुष्य और दानवों का वह घोर एवं भयानक युद्ध आरम्भ हो गया, जिससे युद्धस्थल में सब लोग भयभीत हो गए ॥45॥
 
Maharaj! Thereafter, that fierce and terrible battle between man and demon began which left everyone in awe in the battlefield. 45॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे अलम्बुषवधे चतु:सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें अलम्बुषवधविषयक एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)