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mahabharat 7.174.42-43h: अब तुम अपनी और कर्ण की वही दशा देखोगे। धर्म, अर्थ और काम की इच्छा रखने वाले पुरुष को राजा, ब्राह्मण और स्त्री से खाली हाथ नहीं मिलना चाहिए (इसीलिए मैं तुम्हारे मित्र का यह सिर भेंट में लाया हूँ)।॥42 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  7.174.42-43h 
पुनर्द्रष्टासि कर्णस्य निष्ठामेतां तथाऽऽत्मन:।
स्वधर्ममर्थं कामं च त्रितयं योऽभिवाञ्छति॥ ४२॥
रिक्तपाणिर्न पश्येत राजानं ब्राह्मणं स्त्रियम्।
 
 
अनुवाद
अब तुम अपनी और कर्ण की वही दशा देखोगे। धर्म, अर्थ और काम की इच्छा रखने वाले पुरुष को राजा, ब्राह्मण और स्त्री से खाली हाथ नहीं मिलना चाहिए (इसीलिए मैं तुम्हारे मित्र का यह सिर भेंट में लाया हूँ)।॥42 1/2॥
 
‘Now you will see the same condition of Karna and yourself. One who desires for his Dharma, Artha and Kama, should not meet the king, Brahmin and woman empty handed (that is why I have brought this head of your friend as a gift).॥ 42 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)