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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 174: घटोत्कच और जटासुरके पुत्र अलम्बुषका घोर युद्ध तथा अलम्बुषका वध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.174.25 
तं प्रमथ्य तत: क्रुद्धस्तूर्णं हैडिम्बिराक्षिपत्।
दोर्भ्यामिन्द्रध्वजाभाभ्यां निष्पिपेष च भूतले॥ २५॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में भरे हुए हिडिम्बा के पुत्र ने उसे अच्छी तरह मथकर तुरन्त ही भूमि पर पटक दिया और इन्द्र के ध्वज के समान उसे अपनी दोनों भुजाओं से रगड़ने लगा।
 
Hidimba's son, filled with anger, churned it thoroughly and immediately threw it on the ground and began rubbing it on the surface with his both arms, like the flag of Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)