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mahabharat 7.173.d1-63: घटोत्कच बोला - हे महारथी! प्रभु! जैसा आप कह रहे हैं, वैसा ही है। मुझे आपने कर्ण का वध करने के लिए भेजा है। भरत! मैं कर्ण का सामना करने में समर्थ हूँ और द्रोणाचार्य का भी अच्छी तरह सामना कर सकता हूँ। मैं इन अन्य महारथी क्षत्रियों के साथ भी युद्ध कर सकता हूँ, जो अस्त्र-शस्त्र विद्या के ज्ञाता हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक d1-63
 
 
श्लोक  7.173.d1-63 
घटोत्कच उवाच
(एवमेव महाबाहो यथा वदसि मां प्रभो।
त्वया नियुक्तो गच्छामि कर्णस्य वधकाङ्क्षया॥)
अलमेवास्मि कर्णाय द्रोणायालं च भारत।
अन्येषां क्षत्रियाणां च कृतास्त्राणां महात्मनाम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
घटोत्कच बोला - हे महारथी! प्रभु! जैसा आप कह रहे हैं, वैसा ही है। मुझे आपने कर्ण का वध करने के लिए भेजा है। भरत! मैं कर्ण का सामना करने में समर्थ हूँ और द्रोणाचार्य का भी अच्छी तरह सामना कर सकता हूँ। मैं इन अन्य महारथी क्षत्रियों के साथ भी युद्ध कर सकता हूँ, जो अस्त्र-शस्त्र विद्या के ज्ञाता हैं।
 
Ghatotkacha said - O mighty warrior! Lord! It is as you are telling me. I am sent by you with the intention of killing Karna. Bhaarat! I am capable of facing Karna and can also face Dronacharya very well. I can also fight with these other great-minded Kshatriyas who know the art of weapons. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)