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mahabharat 7.173.8: आर्य! वहाँ धृष्टद्युम्न सहदेव के रथ पर सवार होकर पुनः कर्ण का सामना करने के लिए तैयार हुए, किन्तु धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.173.8 
आरुरोह रथं चापि सहदेवस्य मारिष।
प्रयातुकाम: कर्णाय वारितो धर्मसूनुना॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आर्य! वहाँ धृष्टद्युम्न सहदेव के रथ पर सवार होकर पुनः कर्ण का सामना करने के लिए तैयार हुए, किन्तु धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें रोक दिया।
 
Arya! There Dhrishtadyumna boarded Sahadeva's chariot and again prepared to go to face Karna, but Dharma's son Yudhishthira stopped him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)