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mahabharat 7.173.67: उस क्रोधी, प्रज्वलित मुख और चमकते केशों वाले राक्षस को आते देख, सारथीपुत्र, नरसिंह कर्ण ने हँसकर उसे अपना प्रतिद्वन्द्वी मान लिया ॥ 67॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.173.67 
तमापतन्तं संक्रुद्धं दीप्तास्यं दीप्तमूर्धजम्।
प्रहसन् पुरुषव्याघ्र: प्रतिजग्राह सूतज:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उस क्रोधी, प्रज्वलित मुख और चमकते केशों वाले राक्षस को आते देख, सारथीपुत्र, नरसिंह कर्ण ने हँसकर उसे अपना प्रतिद्वन्द्वी मान लिया ॥ 67॥
 
Seeing that angry, blazing face and shining haired Rakshasa approaching, Karna, the son of a charioteer, a man-lion, smilingly accepted him as his rival. ॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)