Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.173.65: इस युद्ध में मैं न तो वीर योद्धाओं को छोड़ूँगा, न कायरों को, न ही हाथ जोड़ने वालों को। राक्षस-धर्म का आश्रय लेकर मैं उन सबका नाश करूँगा ॥ 65॥ | mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चात्र शूरान् मोक्ष्यामि न भीतान्न कृताञ्जलीन्।
सर्वानेव वधिष्यामि राक्षसं धर्ममास्थित:॥ ६५॥
अनुवाद
इस युद्ध में मैं न तो वीर योद्धाओं को छोड़ूँगा, न कायरों को, न ही हाथ जोड़ने वालों को। राक्षस-धर्म का आश्रय लेकर मैं उन सबका नाश करूँगा ॥ 65॥
In this war I will neither spare the valiant warriors, nor the cowards, nor those who fold their hands. Taking recourse to the demon-dharma I will destroy them all. ॥ 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥