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श्लोक 7.173.61  |
तद्भवान् यातु कर्णेन द्वैरथं युध्यतां निशि।
सात्यकि: पृष्ठगोपस्ते भविष्यति महारथ:॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| अतः तुम्हें इसी रात्रि में कर्ण के साथ द्वन्द्वयुद्ध करना चाहिए और महारथी सात्यकि तुम्हारे पीछे रक्षक होंगे। |
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| Therefore you should fight a duel with Karna in this night and the great warrior Satyaki will be your rear guard. |
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