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mahabharat 7.173.56: परंतप! रात्रि के समय कर्ण के बाणों से उत्पन्न घावों और घावों के कारण पाण्डव सैनिक क्षीण हो गए हैं और कौरव सेना समुद्र में डूब रही है। आप उनके लिए किनारा बन जाइए॥56॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.173.56 
पाण्डवानां प्रभग्नानां कर्णेन निशि सायकै:।
मज्जतां धार्तराष्ट्रेषु भव पारं परंतप॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
परंतप! रात्रि के समय कर्ण के बाणों से उत्पन्न घावों और घावों के कारण पाण्डव सैनिक क्षीण हो गए हैं और कौरव सेना समुद्र में डूब रही है। आप उनके लिए किनारा बन जाइए॥56॥
 
Parantapa! The Pandava soldiers have lost their feet due to the wounds and wounds caused by Karna's arrows at night and they are drowning in the sea of ​​the Kaurava army. You become the shore for them. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)