श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.173.55 
तव ह्यत्र बलं भीमं मायाश्च तव दुस्तरा:।
संग्रामे युध्यमानस्य सततं भीमनन्दन॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे भीमपुत्र! युद्धभूमि में युद्ध करते समय तुम्हारा भयंकर बल सदैव बढ़ता जाता है और तुम्हारी माया दुर्जय होती जाती है॥55॥
 
O son of Bhima! While fighting on the battlefield your terrible strength always increases and your illusions become insurmountable. ॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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