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mahabharat 7.173.49: उसके बाणों की अग्नि से क्रोधित होकर बाणों की भारी वर्षा करने वाले बड़े-बड़े धनुर्धर भी युद्धभूमि में स्थिर नहीं रह पाते ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.173.49 
किरन्त: शरवर्षाणि महान्ति दृढधन्विन:।
न शक्नुवन्त्यवस्थातुं पीडॺमाना: शरार्चिषा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उसके बाणों की अग्नि से क्रोधित होकर बाणों की भारी वर्षा करने वाले बड़े-बड़े धनुर्धर भी युद्धभूमि में स्थिर नहीं रह पाते ॥49॥
 
Enraged by the fire of his arrows, even the strongest archers, who shoot heavy showers of arrows, are unable to stand firm on the battlefield. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)