श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.173.46 
स भवान् मज्जमानानां बन्धूनां त्वं प्लवो भव।
विविधानि तवास्त्राणि सन्ति माया च राक्षसी॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे ये मित्र क्लेशों के समुद्र में डूब रहे हैं, तुम उनके जहाज बन जाओ। तुम्हारे पास नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र हैं और आसुरी माया का बल भी तुम्हारे पास है।॥46॥
 
These friends of yours are drowning in the sea of ​​troubles, you become their ship. You have various kinds of weapons and you also have the power of demonic illusion. ॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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