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श्लोक 7.173.46  |
स भवान् मज्जमानानां बन्धूनां त्वं प्लवो भव।
विविधानि तवास्त्राणि सन्ति माया च राक्षसी॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| तुम्हारे ये मित्र क्लेशों के समुद्र में डूब रहे हैं, तुम उनके जहाज बन जाओ। तुम्हारे पास नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र हैं और आसुरी माया का बल भी तुम्हारे पास है।॥46॥ |
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| These friends of yours are drowning in the sea of troubles, you become their ship. You have various kinds of weapons and you also have the power of demonic illusion. ॥ 46॥ |
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