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mahabharat 7.173.42: भगवान श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर महाबाहु कमलनेत्र कुन्तीकुमार ने राक्षस घटोत्कच का आह्वान किया और वह तुरन्त उनके समक्ष प्रकट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.173.42 
एवमुक्तो महाबाहु: पार्थ: पुष्करलोचन:।
आजुहावाथ तद् रक्षस्तच्चासीत् प्रादुरग्रत:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर महाबाहु कमलनेत्र कुन्तीकुमार ने राक्षस घटोत्कच का आह्वान किया और वह तुरन्त उनके समक्ष प्रकट हो गया।
 
On Lord Krishna saying this, the mighty-armed lotus-eyed Kuntikumar invoked the demon Ghatotkacha and he immediately appeared before him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)