श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.173.41 
सततं चानुरक्तो वो हितैषी च घटोत्कच:।
विजेष्यति रणे कर्णमिति मे नात्र संशय:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
घटोत्कच आपका हितैषी है और सदैव आपसे स्नेह रखता है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह युद्धभूमि में कर्ण को परास्त कर देगा ॥ 41॥
 
Ghatotkacha is your well-wisher and always has affection for you. I have no doubt that he will defeat Karna on the battlefield. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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