श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.173.37 
न तु तावदहं मन्ये प्राप्तकालं तवानघ।
समागमं महाबाहो सूतपुत्रेण संयुगे॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप एवं बलवान अर्जुन! मैं इस समय इस रणभूमि में सारथिपुत्र के साथ तुम्हारा युद्ध करना उचित नहीं समझता।
 
O sinless and powerful Arjuna! I do not consider it appropriate for you to fight with the son of a charioteer on this battlefield at this time. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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