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mahabharat 7.173.36: हे नरसिंह धनंजय! युद्धस्थल में तुम्हारे या राक्षस घटोत्कच के अतिरिक्त और कोई नहीं है जो उसका सामना कर सके।   |   mahabharat अध्याय 7.173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.173.36 
नैतस्यान्योऽस्ति संग्रामे प्रत्युद्याता धनंजय।
ऋते त्वां पुरुषव्याघ्र राक्षसाद् वा घटोत्कचात्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह धनंजय! युद्धस्थल में तुम्हारे या राक्षस घटोत्कच के अतिरिक्त और कोई नहीं है जो उसका सामना कर सके।
 
O lion of men, Dhananjaya! There is no one else in the battlefield who can face him except you or the demon Ghatotkacha. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)