श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 173: कर्णद्वारा धृष्टद्युम्न एवं पांचालोंकी पराजय, युधिष्ठिरकी घबराहट तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनका घटोत्कचको प्रोत्साहन देकर कर्णके साथ युद्धके लिये भेजना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.173.35 
श्रीवासुदेव उवाच
पश्यामि कर्णं कौन्तेय देवराजमिवाहवे।
विचरन्तं नरव्याघ्रमतिमानुषविक्रमम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले- कुन्तीनन्दन! आज मैं नरसिंह कर्ण को युद्धस्थल में अमानवीय पराक्रम दिखाते हुए तथा देवराज इन्द्र के समान विचरण करते हुए देख रहा हूँ॥35॥
 
Lord Shri Krishna said- Kuntinandan! Today, I am seeing the male lion Karna displaying inhuman bravery and moving around like Devraj Indra in the battlefield. 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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